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Archive for August 28th, 2006

तुम जा रही हो ,उनके पास ,
प्रिय पाती !
बताना ,उनको वो बातें ,जो मैं नही बताती|
बताना, कैसे शब्दों को पिरोया है मैंने, भावों में,
वाक्य-रचना नहीं मुझे आती|
बताना, कैसे अभ्यास नहीं, मुझे लिख्ने का ,
इसलिए शब्दों को रही घुमाती|
बताना, कैसे मेरी उँगलियाँ चलती रही ,रात भर,
उनके एह्सास से ,मेरी सारी थकन रही जाती|
बताना, कैसे स्वप्न देते [...]

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