घरौंदा
September 2, 2006 by shipsag
जाना है हमें सूरज के घर,
अपने घरौंदे के लिये उजाला लाने को|
पूछना है पंछियों से तिनकों का पता,
अपना आशियाँ बनाने को|
करनी है चाँद की चिरौरी,
चाँदनी को अपने घर बुलाने को|
तकनी है सितारोँ की राह ,
अपने स्वप्नों के घरौंदे को सजाने को|
चलना है थकन की पगडण्डियों पर,
चौबारे के बरगद की छाँव पाने को|
हाँ , जाना होगा किरणों के रथ पर चढ,
अपने आँगन में खुशियों की धूप लाने को|
माधुर्य-पूर्ण!
बहुत बढिया
हमें भी शब्दकोश के पास जाना है,
प्रतिक्रिया के लिए शब्द लाने को|
एक अच्छी रचना के लिए बधाई|
बहुत सुंदर.. आपसे आपका ब्लोग लिंक करने की अनुमती चाहूंगा..