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Archive for September 5th, 2006

मीठा एहसास

खिङकियो के जंगले पर,
हौले से इधर -उधर झाँकती है|
मेरे आँगन की चटाई पर बैठ ,
 मेरा हाथ बँटाती है|
बरामदे की क्यारियों में,
चुपके से फूलों से बाते कर जाती है|
घर के दरवाजों पर चढ- चढ,
आङी- तिरछी सूरत बनाती है|
कोने में रखी सुराही से,
सारा पानी पी जाती है|
मेरे गीले बालों में रुकी बून्दों को,
चोरी से साथ ले जाती [...]

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