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Archive for September 11th, 2006

मानसून

धरती गाती जा रही है,नये तराने |
इठलाने के ढूँढ,नित नये बहाने |
सोती है गीतों को रख,अपने सिरहाने |
लगी अबूझ पहेलियाँ,यों ही सुलझाने|
नहीं किसी से वो अब,कभी हार माने,
लगे पराये उसे ,सब जाने-अजाने
क्योंकि बरसों की प्रेम-क्षुधा बुझाने,
सूखे पातों पर हरे रंग की तूलिका चलाने,
चटख  आवरण से उसका आँचल सजाने,
दिन आये उसका रोम-रोम मानसून की पहली बारिश [...]

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