पिघल रहा था वो बादल
Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on September 13, 2006 | 3 Comments »
पिघल रहा था वो बादल,
निचोङ अपने हर अंश को,
बरखा की निखरी सी बूंदों में|
ढल रहा था उसका अस्तित्व,
उनींदी सी कोमल कलियों का,
यौवन सँवारने में|
जी उठे थे सूखे पात,
सौन्धी हो गयी थी मिट्टी ,
बुझा अपनी प्यास भीगी बरसात में|
असीमित ,निर्बाध, गगन को,
जब फैला हथेली देख रही थी मैं ,
लदी थी वो बारिश की बूँदो से|
बून्दें जो [...]