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Archive for September 22nd, 2006

मच्छर गाथा

एक दिन यूँ ही टहलते हुए, हम घर से थोङा दूर आ गये| कहीं एक कोने में बारिश का पानी इकट्ठा हो गया था| वहीं कुछ मच्छरों ने अपनी चौपाल सजा रखी थी| जाने हमें भी क्या सूझी, हम वहीं खङे होकर उनका वार्तालाप सुनने लगे| (ये विचित्र विधा हमने कैसे सीखी ये फिर कभी [...]

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