अमरीका आकर हमें महिला शब्द का एक नवीन प्रकार का संधि- विच्छेद पता चला : महिला =महि+हिला , महि अर्थात धरती , अतः महिला का अर्थ हुआ जो चले तो धरती को हिलाए | यहाँ की पिज्जा - बर्गर की डाइट में स्थूलकाय होना कोई मुश्किल कार्य तो है नही, इसलिये हमने तो पहले ही सचेत रहने की ठानी | तो फिटनैस की ओर पहला कदम बढाते हुए हम सोमवार सुबह जल्दी उठ गये | जिम के लिये तैयार हुए और चल दिये सोसाइटी के जिम की ओर |हमने सोचा था , इतनी सुबह तो कोई होगा नही वहाँ ,इसलिये हमें कोई उलझन नही होगी | पर ये क्या, हमारी आशाओं के विपरीत द्वार पर पँहुचते ही अन्दर से आ रही खटपट से हम समझ गये कि कोई हमसे भी पहले उठकर ट्रैडमिल पर कब्जा जमा चुका है |
मन मसोस कर हम अंदर घुसे तो विस्मित रह गये|सामने साक्षात गणेश जी महाराज स्नीकर्स और ट्रैकसूट पहन कर इलिप्टिकल मशीन पर कैलोरीज बर्न कर रहे हैं | हमने लम्बोदर को दण्डवत प्रणाम किया और उनसे पूछ भी लिया ” प्रभु आप यहाँ अमरीका में | ” मुस्करा कर विघ्नहरन बोले कि ” देवलोक एअरलाइन्स ने आजकल एअरफेअर्स कम कर रखे हैं , तो मैने सोचा ऋद्धि- सिद्धि को अमरीका ही दिखा लाऊँ | ” हमने कहा कि ” ये तो आपने बहुत ही अच्छा किया , इसी बहाने यहाँ की अपावन धरती भी पवित्र हो गयी और हमारे जैसे भक्तों को प्रभु के दर्शन भी हो गये , वर्ना यहाँ आकर तो त्यौहारों के इस महीने का पता ही नही चलता | ” इस पर मंगलकरन मुझे सही करते हुए बोले ” नही पुत्री ऐसा नही है,कल ही तो मैं ऋद्धि- सिद्धि के साथ गरबा खेलने गया था , अपने मुम्बई के लोगों से कम जोश नही था ,वहाँ पर | विशुद्ध भारतीय परिधानों में सजी हुई अब अमरीकी हो चुकी भारतीय बालाएँ बीयर पीकर काफी सहजता से डांडिया खेल रही थी | इस स्थूलकाया के साथ मैं तो ज्यादा देर वहाँ टिक नही पाया और वहाँ से खिसक लिया | ”
इस पर हमने पूछा कि , “ हे गणपति! आखिर ऐसा क्या हुआ कि आपको इस जिम को अपने पावन चरणों से पवित्र करना पङा |” इतना सुनकर महादेव-पुत्र का मुख उदास हो गया बोले -” पुत्री आज तुमसे मैं मन की बात कह ही देता हूँ , देवलोक में सारे देवताओं की बालिवुडिया हीरो के जैसी मस्कुलर बाडी देखकर मुझे मेजर काम्प्लैक्स होता है , और तो और पिताश्री शिव जी महाराज भी ताँडव नृत्य कर तथा पदमासन में बैठ कर अब तक छरहरे बने हुए हैं , उनको देखकर तो मुझे ठीक वैसा ही लगता है जैसा बण्टी और बबली फिल्म में अभिषेक बच्चन को लगा था जब ऐश्वर्या राय अमिताभ बच्चन को देखकर मुस्कराई थी |” अभी श्री विनायक जी ने इतना ही बताया था कि उनका कैमरे वाला सैलुलर फोन घनघना उठा और प्रभु “ऐक्सक्यूज़ मी” कहकर साइड हो लिये | उधर से गणेश जी के वाम विराजने वाली माता ऋद्धि की आवाज आ रही थी ,” प्राणनाथ आज तो आप हमें डिज़्नीलैण्ड लेकर जाने वाले थे ,सुबह- सुबह कहाँ चले गये | ” फोन रख कर जाने को उद्धत होते हुए एकदंत बोले - ” एक बात और इस बार दीवाली पर भोग लगाते हुए मीठा अवौइड करना , दरअसल मैं डाइटिन्ग पर हूँ,और अपने दोस्तों को भी जरूर बताना|” अब प्रभु की आज्ञा शिरोधार्य - हमने आप सब को बताकर अपना कर्तव्य पूर्ण किया , आशा है आप भी अपने दोस्तों को ज़रूर बताएँगे |
वाह, क्या ख़ूब लिखा है आपने। लेकिन मुझे टेंशन इस बात की है कि कहीं गणेश जी अमरीका में ही जाकर तो नहीं बस गए।
वैसे, मैंने भी जिम में अपने अनुभवों के बारे में लिखा था। कभी वक़्त मिले तो पढिएगा।
बहुत बढिया लिखा है आपने! शब्द कम पड रहे हैं आपकी तारीफ में!
“विशुद्ध भारतीय परिधानों में सजी हुई अब अमरीकी हो चुकी भारतीय बालाएँ बीयर पीकर काफी सहजता से डांडिया खेल रही थी | इस स्थूलकाया के साथ मैं तो ज्यादा देर वहाँ टिक नही पाया और वहाँ से खिसक लिया | ”
…बहुत बेहतरीन चित्रण है. और हाँ, इस बार हम भी स्विट एंड लो वाली मिठाई चड़ायेंगे..आखिर में, खाना तो हमें ही है.
बढिया लिखा
Bahut Khoob. Well written & humourous.
– Punit
“महिला =महि+हिला , महि अर्थात धरती , अतः महिला का अर्थ हुआ जो चले तो धरती को हिलाए”
पिज्जा-बर्गर की डाइट लेकर स्थूलकाय हो रहे मनुष्यों पर संधि- विच्छेद के माध्यम से कटाक्ष करने का तरीका काफि रोचक लगा।
“विशुद्ध भारतीय परिधानों में सजी हुई अब अमरीकी हो चुकी भारतीय बालाएँ बीयर पीकर काफी सहजता से डांडिया खेल रही थी”
गुजराती कला (डांडिया) की इससे ज्यादा दुर्गति और क्या हो सकती है? कला को समझने के बजाय अब लोग बीयर के नशे में झुमने वालों को भी डांडिया-नृतक कह रहें है।
डांडिया लिखा हैं वह सही ही लिखा हैं. श्रद्धाभाव से तो गरबे किये जाते हैं.
व्यंग्य अच्छा लिखा हैं.
अरे वाह, गणेश जी का ये आख्यान तो वाकई मजेदार है| बहुत ही मजा आया पढकर|
वाह क्या बात है ! तो विघ्नविनाशक को ऐसे भी दिन देखने थे . कलियुग में जो न हो जाए सो थोड़ा . जय गणपति महाराज , पूरण हों आपके काज . कैलोरी बर्न के बाद होवें स्लिम-सुगठित अवतार .
अच्छा लिखा आपने, बढिया
बहुत अच्छा लिखा है।