निराले रंग
Posted in drishti on March 27, 2007 | 2 Comments »
रंग भी बहुरूपिये से रंग बदलते हैं,
कभी चटख, कभी बदरंग लगते है|
पुरानी किताब की नयी ज़िल्द में,
बन-ठन कर कितना इतराते हैं|
माँ की सन्दूक की साडियों में,
तहों के बीच फीके से लगते हैं|
पन्ना दर पन्ना अखबार में,
खबरों में बिन-बात ही उलझते हैं|
बारिश में धुल गयी दीवारों में,
चौबारे के साथ गीत गुनगुनाते हैं|
दरवाज़ों पर उग आये कुकुरमुत्तों [...]