तेनालीराम से साक्षात्कार
March 29, 2007 by shipsag
आज सडक पर हम चलते जा रहे थे | अचानक हमारी नज़र सडक के किनारे अनमने और उदास से बैठे एक शिखाधारी, दीन-हीन से दिखने वाले प्राणी पर जा टिकी | जाने क्यों हमें लगा कि हो ना हो ये कोई जाना-पहचाना बुद्धिजीव है | पास जाकर ऐसा लगा कि, इससे तो ऐसा लगता है बचपन में कई बार मिल चुके हैं, परंतु स्मृति की गठरी लाख खंगालने के बाद भी समझ नही आया कि वो भलामानुष आखिर है कौन |
आखिरकार हमने उन्ही के पास जाकर विनम्रतापूर्वक पूछ लिया,” हे महापुरुष क्या आप इस तुच्छ प्राणी को अपना परिचय देने का कष्ट करेंगे ?” ऐसा सुनकर वो कुछ अचकचाये, फिर ये सोचकर कि प्रश्न शायद उनकी ओर इंगित ना हो, उन्होने इधर-उधर झाँका, परंतु इधर-उधर किसी को ना देखकर वो एक उत्साह भरी मुस्कान चेहेरे पर लाकर बोले कि “चलो इस इलेक्ट्रॉनिक युग में किसी ने तो मुझे पहचाना | मेरा नाम तेनालीराम है,राजा कृष्णदेव राय के यहाँ मंत्री हुआ करता था, एक समय में बच्चे बडे चाव से मेरे किस्से पढते-सुनते थे पर आजकल किसी के पास फुर्सत कहाँ | स्कूल के होमवर्क का दस मन का बोझ निपटाने के बाद जो समय बचता है वो कार्टून नेटवर्क के सामने बैठकर ही बीत जाता है | और जो अगर थोडा समय बच जाता है वो प्ले-स्टेशन और एक्स-बॉक्स के खाते में चला जाता है |बच्चों की मम्मियों को किट्टी पार्टी से फुर्सत नहीं और पापा बेचारे तो रोज़ी -रोटी और नये ब्राण्ड की गाडी के चक्कर में ही पिसे जाते हैं, दादा-दादी के साथ रहने का फैशन तो कब का आउट-डेटिड हो गया तो हमारे जैसों के किस्से बेचारे बच्चे कहाँ से जाने| “
उनकी बातें गौर से सुनने के बात जब हमने एक बार फिर उनके चेहरे को देखा तो तो हमें तुरन्त उनकी बात पर विश्वास हो गया | बचपन से तेनालीराम, बीरबल आदि के किस्से सुनते -पढते आये हैं इसलिये ऐसा लगा कि पहचानने में गलती कैसे कर सकते हैं | हमने स्वभाव- वश तुरन्त अपना अगला सवाल उनकी तरफ दागा, “हे चतुर-चपल मनुष्य, आपका यहाँ आने का प्रयोजन?
इस पर परम ज्ञानी, परम चपल तेनालीराम जी एक फीकी मुस्कान चेहरे पर लाकर बोले कि- कल ही मैंने और मेरे मित्र बीरबल ने एक विज्ञापन देखा जिसमे एक जापानी एनिमेशन क्म्पनी ने प्रसिद्ध भारतीया चरित्रों को एनिमेट करने के लिये उन्हें आडिशन के लिये आमंत्रित किया था | हमने सोचा नयी पीढी के बच्चों से जान-पहचान बढाने का सही मौका है ,सो चले आये | पर यहाँ दाव इण्डियन क्रिकेट टीम ले गयी, वर्ल्ड- कप हारने के बाद किसी को भी उनसे बढे कार्टून नज़र नहीं आते तो हमारे जैसों की क्या बिसात |खैर बीरबल जी को तो अपनी वाक्-पटुता के कारण एक एनिमेटेड टॉक-शो में काम मिल गया, हमें ही अपना सा मुँह लेकर वापसी की गाडी पकडनी पडेगी |
अपने प्रिय पात्र को यों गुमनामी के कारण उदास देखकर हमें बेहद कष्ट हुआ |फिर हमने सोचा कि टीवी के कार्टून वर्ल्ड में इस पात्र को भले ही जगह ना मिली,लेकिन हमारे ब्लॉगर वर्ल्ड के कम्प्यूटर महारथी जरूर इस दिशा में कुछ कर सकते हैं इसीलिए इस साक्षात्कार का शब्दशः वर्णन हमने यहाँ लिख डाला |शायद हम तेनालीराम के किस्से इन्टरनेट पर ही पढ -सुन सकें |
बेचारे तेनालीराम! उन्हें हमारा हैलो कहना मत भूलना।
घुघूती बासूती
कम से कम आप तेनाली जी को किसी माल मे घुमा कर पिज्जा तो खिला देते और पी वी आर मे एक पिक्चर दिखा कर विदा करना था उनकी कुछ शिकायते तो कम हो जाती