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Archive for April 19th, 2007

कभी किसी बिछङे से पूछो,
कैसे घर की याद सताती है|
बारिश में सौन्धी हुई मिट्टी,
मन भीतर तक गीला कर जाती है|
तस्वीरों में जो बचपन थोङा बाकी है,
यादें उसकी अब भी गुदगुदाती हैं|
बाज़ार में सजी कोई फुलकारी,
दूर अपने देस ले जाती है|
कभी किसी बिछङे से पूछो,
कैसे घर की याद सताती है|
खुशियाँ दिलासा देने जब,
कभी-कभार दस्तक दे जाती [...]

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