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April 21, 2007 by shipsag
बन गयी मिसेज बच्चन, कल मिस राय,
कह कर पुराने आशिकों को टाटा -बाय-बाय,
जाने कितनों के सीनों पर खंजर चलाए,
जिन्होने बाल्टी भर-भर आँसू बहाए|
जुगल जोडी के दर्शन की आस लगाए,
प्रतीक्षा करती रही पब्लिक टकटकी लगाए,
और संवाद-दाता अडे रहे डेरा जमाए|
जो मिली किसी को कोई फालतू खबर,
हर चैनल बार-बार वही दोहराए|
किसने किस रंग की साडी पहनी,
किसने कितने जाम छलकाए,
बिना रुके समाचार वाचक सारा दिन यही चिल्लाए,
ना तो वो भीतर का लाइव टेलिकास्ट दिखाएँ,
ना क्या चल रहा है दुनिया में, गलती से ये ही सुनाएँ,
बोर होकर बताइये फिर क्यों ना मन झल्लाए?
फिर भी पाने को एक झलक, रहे टीवी में नज़रें गडाए
हाल देखकर दुनिया के दीवानेपन का,
प्रश्न एक दिल में मेरे बार- बार आए,
क्यों अब्दुल्ला दीवाना, बेगानी शादी में हुआ जाए?
वाह बहुत खूब, मजेदार व्यंग्य!
बहुत खूब । क्या करें चैनल का दिल है कि मानता ही नहीं । वो अब पगला गए हैं । रोकों तो पत्थर मार देते हैं ।
काहे देखे फोकटिया चैनल्स. ब्लाग पर टिपियाते तो अच्छा होता. देखो जैसे हम बढ़िया रचना पर टीपिया रहे हैं.
bohat he sundar. its hillarious must say

well ash and abhi did get the whole indian community wonder but for sure the wedding of the year was something worth a talk….
keep writing
zameh