किरणों की लेखनी से
August 10, 2007 by shipsag
<!–chitthajagat claim code–>
<a href=”http://www.chitthajagat.in/?claim=hl48tmwziqhm” title=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी”><img src=”http://www.chitthajagat.in/images/claim.gif” border=”0″ alt=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी” title=”चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी”;></a>
<!–chitthajagat claim code–>
किरणों की लेखनी चला,
लिख देता है, रोज़ दिन नया दिवाकर्,
सागर की चंचल लहरों पर|
सुनहरी रोशनाई से अलंकृत कर,
लहरों के अल्हङ शैशव को,
तरुणाई की सीमा-पार ले जाता है|
दिखलाता है दिन नया,
सुनहरे अम्बर का दर्पण,
और जाते हुए, दे जाता है,
ऊर्जा किनारों पर चोट करने की….
ऊर्जा अपने अस्तित्व को पाने की….