Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on July 31, 2007 | No Comments »
एक क्यारी में कच्ची सी,
एक पौधा लगा दिया है
जो पावस की बूँदों को,
नन्हीं पत्तियों में समेटता है
झोंकों से हवाओँ के,
लङता कभी, कभी झगङता है
किरणों की पीली छटा में,
अलसाता कभी, कभी निखरता है
ताल को बारिश की,
राग मल्हार समझ थिरकता है
दरारों में मिट्टी की,
अपने भावी आकार बुनता है
पर भूरी उदासी को मिटाने को,
थोङी और हरियाली के स्वप्न [...]
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Posted in drishti, tagged Uncategorized on April 21, 2007 | 4 Comments »
बन गयी मिसेज बच्चन, कल मिस राय,
कह कर पुराने आशिकों को टाटा -बाय-बाय,
जाने कितनों के सीनों पर खंजर चलाए,
जिन्होने बाल्टी भर-भर आँसू बहाए|
जुगल जोडी के दर्शन की आस लगाए,
प्रतीक्षा करती रही पब्लिक टकटकी लगाए,
और संवाद-दाता अडे रहे डेरा जमाए|
जो मिली किसी को कोई फालतू खबर,
हर चैनल बार-बार वही दोहराए|
किसने किस रंग की साडी पहनी,
किसने कितने [...]
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Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on March 29, 2007 | 2 Comments »
आज सडक पर हम चलते जा रहे थे | अचानक हमारी नज़र सडक के किनारे अनमने और उदास से बैठे एक शिखाधारी, दीन-हीन से दिखने वाले प्राणी पर जा टिकी | जाने क्यों हमें लगा कि हो ना हो ये कोई जाना-पहचाना बुद्धिजीव है | पास जाकर ऐसा लगा कि, इससे तो ऐसा लगता है [...]
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Posted in rishte, tagged Uncategorized on March 23, 2007 | 6 Comments »
बरसों बाद खुले,कुछ पुरानी किताबों के पन्ने|
उम्र के बोझ तले,पीले साँचे में ढले,
पन्ने कुछ अधखुले,आज यों खुले,
सूखे गुलाबों की बासी खुशबू समेटे,
वक्त से पिछङ,कल को आज में लपेटे,
कागज़ के मुङे- तुङे पुर्जे छुपाये हुए,
जाने कितने राज़ सीने में दबाये हुए,
भीगे मौसमों की स्याही फैलाये हुए,
अश्कों के निशां गालों पर सजाये हुए,
बरसों बाद खुले कुछ पुरानी [...]
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Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on September 21, 2006 | 9 Comments »
नये ज़माने के रंग में,
पुरानी सी लगती है जो|
आगे बढने वालों के बीच,
पिछङी सी लगती है जो|
गिर जाने पर मेरे,
दर्द से सिहर जाती है जो|
चश्मे के पीछे ,आँखें गढाए,
हर चेहरे में मुझे निहारती है जो|
खिङकी के पीछे ,टकटकी लगाए,
मेरा इन्तजार करती है जो|
सुई में धागा डालने के लिये,
हर बार मेरी मनुहार करती है जो|
तवे से उतरे हुए ,गरम [...]
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Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on September 13, 2006 | 3 Comments »
पिघल रहा था वो बादल,
निचोङ अपने हर अंश को,
बरखा की निखरी सी बूंदों में|
ढल रहा था उसका अस्तित्व,
उनींदी सी कोमल कलियों का,
यौवन सँवारने में|
जी उठे थे सूखे पात,
सौन्धी हो गयी थी मिट्टी ,
बुझा अपनी प्यास भीगी बरसात में|
असीमित ,निर्बाध, गगन को,
जब फैला हथेली देख रही थी मैं ,
लदी थी वो बारिश की बूँदो से|
बून्दें जो [...]
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Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on September 11, 2006 | 1 Comment »
धरती गाती जा रही है,नये तराने |
इठलाने के ढूँढ,नित नये बहाने |
सोती है गीतों को रख,अपने सिरहाने |
लगी अबूझ पहेलियाँ,यों ही सुलझाने|
नहीं किसी से वो अब,कभी हार माने,
लगे पराये उसे ,सब जाने-अजाने
क्योंकि बरसों की प्रेम-क्षुधा बुझाने,
सूखे पातों पर हरे रंग की तूलिका चलाने,
चटख आवरण से उसका आँचल सजाने,
दिन आये उसका रोम-रोम मानसून की पहली बारिश [...]
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Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on September 5, 2006 | 2 Comments »
खिङकियो के जंगले पर,
हौले से इधर -उधर झाँकती है|
मेरे आँगन की चटाई पर बैठ ,
मेरा हाथ बँटाती है|
बरामदे की क्यारियों में,
चुपके से फूलों से बाते कर जाती है|
घर के दरवाजों पर चढ- चढ,
आङी- तिरछी सूरत बनाती है|
कोने में रखी सुराही से,
सारा पानी पी जाती है|
मेरे गीले बालों में रुकी बून्दों को,
चोरी से साथ ले जाती [...]
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Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on September 2, 2006 | 4 Comments »
जाना है हमें सूरज के घर,
अपने घरौंदे के लिये उजाला लाने को|
पूछना है पंछियों से तिनकों का पता,
अपना आशियाँ बनाने को|
करनी है चाँद की चिरौरी,
चाँदनी को अपने घर बुलाने को|
तकनी है सितारोँ की राह ,
अपने स्वप्नों के घरौंदे को सजाने को|
चलना है थकन की पगडण्डियों पर,
चौबारे के बरगद की छाँव पाने को|
हाँ , जाना होगा [...]
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Posted in Uncategorized, tagged Uncategorized on August 28, 2006 | 1 Comment »
तुम जा रही हो ,उनके पास ,
प्रिय पाती !
बताना ,उनको वो बातें ,जो मैं नही बताती|
बताना, कैसे शब्दों को पिरोया है मैंने, भावों में,
वाक्य-रचना नहीं मुझे आती|
बताना, कैसे अभ्यास नहीं, मुझे लिख्ने का ,
इसलिए शब्दों को रही घुमाती|
बताना, कैसे मेरी उँगलियाँ चलती रही ,रात भर,
उनके एह्सास से ,मेरी सारी थकन रही जाती|
बताना, कैसे स्वप्न देते [...]
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